Advertisement

वाराणसी: 11वीं के छात्र ने बनाया अजूबा बैग, कोरोना सुरक्षा से लेकर गुमशुदगी तक का करेगा रिपोर्ट

वाराणसी के आर्यन इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले पुष्कर ने बताया कि, "कोरोना के बढ़ रहे केसों को देखते हुए मैंने एक एंटी कोरोना स्मार्ट…

Advertisement
11 वीं में पढ़ने वाले छात्र पुष्कर सिंह।

देशभर में कोरोना ने एकबार फिर पैर पसार लिया है। सुरक्षा के लिहाज से बड़े शहरों से एक बार फिर पलायन शुरू हो गया है वहीं स्कूल, कॉलेज भी बंद कर दिए गए हैं। इससे छोटे बच्चों की पढ़ाई का ज़्यादा नुकसान हो रहा है। इन्हीं सबको देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के 11 वीं में पढ़ने वाले छात्र पुष्कर सिंह ने एक ऐसा बैग बनाया है जो कि ना सिर्फ बच्चों को संक्रमण के कहर से बचाएगा, बल्कि बच्चों के खो जाने पर उनको ढूंढने में परिवार और पुलिस के लिए मददगार साबित होगा।

वाराणसी के आर्यन इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले पुष्कर ने बताया कि, “कोरोना के बढ़ रहे केसों को देखते हुए मैंने एक एंटी कोरोना स्मार्ट बैग का इजाद किया है। यह स्कूल बैग सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो कराने के साथ ही बच्चों के गुम हो जाने पर भी काम करेगा। यह स्कूल बैग वायरस से बचाव में 2 गज की दूरी बनाने में स्कूल कैंपस और आस-पास के इलाकों को अलर्ट करेगा।”

Advertisement

बैग की क्या है ख़ासियत?

इस डिवाइस बैग के आगे- पीछे 2 अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाये गये हैं। बैग को पीठ पर टांगते ही सेंसर एक्टिव हो जाएंगे। सेंसर एक्टिव होते ही आपके दाएं-बाये दो मीटर के दायरे में आपके नजदीक आने वाले व्यक्ति देखते ही यह आलर्म बजाने लगेगा। जिससे आप सचेत हो जाएंगे। इसके अलावा इसमें एक विषेश प्रकार का बार कोड लगा है, जिसमें बच्चें पिता का नाम, पता और मोबाइल नंबर होगा। यदि आपका बच्चा कहीं खो जाता है। तो उसे इसके जारिए घर पहुंचाने में आसानी होगी।

कितनी है बैग की लागत

Advertisement

इसे बनाने में एक सप्ताह का समय लगा है। इसकी लागत 1500-2000 के बीच की है। इसमें ऑर्डिनो, अल्ट्रासोनिक सेंसर, 3.7 वोल्ट बैटरी, अलार्म, पुस स्विच, बार कोड का इस्तेमाल किया गया है।

आर्यन इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन विनीत चोपड़ा ने बताया कि कोरोना को देखते हमारे स्कूल के कक्षा 11 वीं के बच्चे पुष्कर ने एक एन्टी कोरोना बैग बनाया है जो कि सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करेगा। साथ ही छोटे बच्चों के गुम होने पर भी यह कारगर सिद्ध होगा। इस बैग की तकनीक को पूरे प्रदेश में इस्तेमाल करने के लिए हमने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियल निशंक और मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखा है।

Advertisement

गोरखपुर के क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय ने बताया कि, “यह तकनीक बच्चों की सोशल डिस्टेंसिंग को बनाये रखने में सहायक होगी। उनकी सुरक्षा और रक्षा करेगी। यह सेंसर बेस तकनीक स्कूलों और कालेजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

Advertisement
ख़बर खर्ची

Share

Recent Posts

VIDEO: हरियाणा में सतह से 5 फीट उपर उठने लगी पानी से भरे खेत की जमीन, मंजर देख हैरान हुए लोग

जमीन उठने की यह घटना 15 जुलाई को करनाल जिले के गांव कुछपुरा की है।…

6 days ago

दैनिक भास्कर ने बताया- किस लिए हुई छापेमारी, दिग्विजय बोले- पत्रकारिता पर मोदी-शाह का प्रहार

दैनिक भास्कर समूह की मूल कंपनी ‘डी बी कॉर्प लिमिटेड’ की वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना…

7 days ago

वाराणसी: PM मोदी ने 1583 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास किया

प्रधानमंत्री ने लगभग 839 करोड़ रुपये की लागत की कई परियोजनाओं और सार्वजनिक कार्यों की…

2 weeks ago

दिलीप कुमार के बारे में वो बातें जो आप नहीं जानते हैं!

ट्रेज़डी किंग के नाम से मशहूर दिलीप कुमार का 98 साल की उम्र में निधन…

3 weeks ago

ऑक्सीजन पर विवाद: दिल्ली सीएम केजरीवाल ने विरोधियों को दे डाली नसीहत- मिलकर लड़ेंगे तो…

केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘ऑक्सीजन पर आपका झगड़ा खत्म हो गया हो तो थोड़ा काम…

1 month ago