15 और 85 फीसदी मजदूरों के रेल किराए के बहस के बीच वसूला गया भाड़ा | ख़बर खर्ची

15 और 85 फीसदी मजदूरों के रेल किराए के बहस के बीच वसूला गया भाड़ा

नासिक से भोपाल जाने वाले मजदूरों से 315 रुपए रेल भाड़ा वसूला गया।

लॉकडाउन के बीच शहरो में फंसे मजदूरों को वापस भेजने के लिए चलाई जा रही विशेष ट्रेनों में मजदूरों से रेल किराया वसूला गया। कई शहरों से ऐसे मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार की किरकिरी होने लगी जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आगे आते हुए कहा कि मजदूरों का किराया उनकी राज्य कांग्रेस कमेटियां भरेंगी।

कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान के बाद शुरू हुई राजनीति और आनन-फानन में सरकार के बचाव में सोशल मीडिया पर एक कागज ( पीआईबी का बयान ) सर्कुलेट किया जाने लगा जिसमें ये दावा किया गया कि ट्रेन से आवागमन का 85 फीसदी खर्चा केंद्र सरकार उठा रही है और 15 फीसदी खर्चा राज्य सरकारों को वहन करना होगा। पीआईबी के इस बयान का जिक्र बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी अपने ट्वीट में किया और कहा कि राहुल गांधी झूठ फैला रहे हैं।

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मालूम हो कि मजदूरों से किराया वसूले जाने को लेकर बीजेपी नेता सुब्रमण्मय स्वामी ने भी नाराजगी जताई थी और कहा था कि जब विदेशों से लाए जाने वाले लोगों से किराया नहीं लिया गया तो मजदूरों से क्यों। ठीक इसी बात को राहुल गांधी ने भी उठाते हुए लिखा था कि एक तरफ रेलवे दूसरे राज्यों में फँसे मजदूरों से टिकट का भाड़ा वसूल रही है वहीं दूसरी तरफ रेल मंत्रालय पीएम केयर फंड में 151 करोड़ रुपए का चंदा दे रहा है। जरा ये गुत्थी सुलझाइए!

उधर, महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे की सरकार में मंत्री नितिन राउत ने एक ट्वीट में कहा- ‘इन लोगों के पास बीते कुछ हफ्तों से आय का कोई स्रोत नहीं है। इसलिए मानवीय आधार पर केंद्र को उनसे यात्रा का किराया नहीं लेना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि कई गैर सरकारी संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता आदि प्रवासी कामगारों की ट्रेन टिकटों का खर्च उठाने के लिए आगे आ रहे हैं। राउत ने ये भी कहा कि किराये के लिए पांच लाख रुपए दिए हैं।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी एक वीडियो में कहा कि हम आए हुए मजदूरों के जिनके किराए लगे हैं उनको 500 रुपए अतिरिक्त देंगे। ये बात उस वक्त कही जब पटना पहुंचे मजदूरों ने बताया कि वह 900 रुपए की टिकट लेकर आए हैं। उनके पास टिकट भी था।

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अब बात रिपोर्ट की करें तो द प्रिंट की ने रेल मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि रेलवे ने पूर्व में जो दिशानिर्देश जारी किये थे उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। पीआईबी अधिकारी डीजे नारायन ने भी कहा कि इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि अभी तक यही स्थिति बनी हुई है कि लोगों से रेल किराया लिया जाएगा।

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वहीं एबीपी न्यूज के इस विडियो रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मजदूर जो टिकट दिखा रहे हैं उसमें उतना ही किराया है जितना आम दिनों में होता था। रेलवे ने एक मई जारी अपने पत्र में कहा था कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वालों से नॉर्मन किराया के अलावा अतिरिक्त 50 रुपये वसूले जाएंगे। इस रिपोर्ट में दिखाया गया कि महाराष्ट्र के नासिक से मध्य प्रदेश के भोपाल के लिए जो ट्रेन चली थी उसमें सभी मजदूरों से पैसे लिये गए थे। मजदूरों ने ये भी कहा कि 305 रुपये की टिकट थी लेकिन उनसे 315 रुपये किराया लिया गया।

वहीं अहमदाबाद मिरर ने भी एक रिपोर्ट छापी है कि गुजरात के अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा से उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ जाने वाले 20 से अधिक प्रवासियों से बात की जिसमें सभी ने एक सुर में कहा कि उन्हें झारखंड और छत्तीसगढ़ छोड़ कर अन्य सभी जगहों पर जाने के लिए पैसे लिए जा रहे हैं।

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