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रामविलास पासवान का निधन, की थीं दो शादियां; राजनीति में आने से पहले प्रशासनिक अधिकारी थे

वर्ष 1975 में जब भारत में आपातकाल की घोषणा की गई तो रामविलास पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया। 1977 में रिहा होने पर वे…

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केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके बेटे और लोक जनशक्ति पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान ने गुरुवार की शाम को उनके निधन के बारे ट्वीट कर जानकरी दी। चिराग ने अपने बचपन का एक फोटो ट्वीट किया, जिसमें वे पासवान के गोद में बैठे हैं और लिखा है- “पापा… अब आप इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मुझे पता है कि आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ है।” 7

गौरतलब है कि भारत की राजनीति में रामविलास ‘मौसम वैज्ञानिक’ के नाम से भी पहचाने जाते थे। उनका राजनीतिक सफर पांच दशक से भी पुराना रहा है। रामविलास ने साल 1969 में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था।

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खगड़िया में एक दलित परिवार में 5 जुलाई 1946 को जन्में रामविलास का राजनीतिक सफर 1969 में शुरू हुआ जिसके बाद वे संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर बिहार विधानसभा के सदस्य बने थे। रामविलास राजनीति में आने से पहले बिहार प्रशासनिक सेवा में अधिकारी थे।

पासवान ने इमरजेंसी का पूरा दौर जेल में गुजारा। इमरजेंसी खत्म होने के बाद पासवान छूटे और जनता दल में शामिल हो गए। जनता दल के ही टिकट पर उन्होंने हाजीपुर संसदीय सीट से 1977 के आम चुनाव में ऐसी जीत हासिल की, जो इतिहास में दर्ज हो गई।

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वीपी सिंह की सरकार में पहली बार कैबिनेट में आए पासवान

1977 की रिकॉर्ड जीत के बाद रामविलास पासवान फिर से 1980 और 1989 के लोकसभा चुनावों में जीते। इसके बाद बनी विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में उन्हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया। अगले कई सालों तक विभिन्न सरकारों में पासवान ने रेल से लेकर दूरसंचार और कोयला मंत्रालय तक की जिम्मेदारी संभाली। इस बीच, वे भाजपा, कांग्रेस, राजद और जदयू के साथ कई गठबंधनों में रहे और केंद्र सरकार में मंत्री बने रहे। पासवान नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली दोनों सरकारों में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रहे हैं।

एनडीए से किया किनारा, यूपीए में बने मंत्री

रामविलास पासवान राजनीति में हर कहीं एडस्ट हो जाते थे। साल 2002 में गोधरा दंगों के बाद तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी वाली सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देकर एनडीए गठबंधन से भी नाता तोड़ लिया था। इसके बाद पासवान कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए में शामिल हुए और मनमोहन सिंह कैबिनेट में दो बार मंत्री रहे। हालांकि, 2014 आते-आते पासवान एक बार फिर यूपीए का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए। 2014 और फिर 2019 में बनी नरेंद्र मोदी की दोनों सरकारों में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में अहम मंत्रालय दिए गए।

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1983 में बनाई दलित सेना

वर्ष 1975 में जब भारत में आपातकाल की घोषणा की गई तो रामविलास पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया। 1977 में रिहा होने पर वे जनता पार्टी के सदस्य बन गए और पहली बार इसके टिकट पर हाजीपुर से संसद पहुंचे और उन्होंने सबसे अधिक अंतर से चुनाव जीतने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया। वे 1980 और 1984 में हाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र से 7वीं लोकसभा के लिए चुने गए। 1983 में उन्होंने दलित मुक्ति और कल्याण के लिए एक संगठन दलित सेना की स्थापना की।

2009 में हार गए थे लोकसभा चुनाव

रामविलास पासवान 2004 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की लेकिन साल 2009 में वे हार गए। 2009 में पासवान ने लालू प्रसाद की पार्टी राजद के साथ गठबंधन किया। पूर्व गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को छोड़ दिया। 33 वर्षों में पहली बार वे हाजीपुर से जनता दल के रामसुंदर दास से चुनाव हार गए।

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ऐसी थी पासवान की निजी जिंदगी

बहुत कम लोग जानते हैं कि रामविलास पासवान ने दो शादियां की थी। पहली पत्नी से दो बेटियां हैं, जबकि दूसरी पत्नी से एक बेटे चिराग पासवान व एक बेटी है। पहली पत्नी का नाम राजकुमारी है जिससे साल 1960 में शादी हुई थी। इसके बाद सालव 1981 में उस पत्नी को तलाक देकर दूसरी शादी 1983 में रीना शर्मा से की। उनकी पहली पत्नी अब भी उनके गांव शहरबन्नी में रहती हैं और इन दिनों बीमार भी हैं। रामविलास की निजी जिंदगी काफी विवादों में भी रही है।

रामविलास की शिक्षा

रामविलास पासवान ने कोसी कॉलेज खगड़िया और पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए और लॉ ग्रेजुएट की डिग्री ली। वह नॉनवेज पसंद करते हैं। मछली उनकी पहली पसंद थी।

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केन्द्रीय मंत्री

1989 में पहली बार केन्द्रीय श्रम मंत्री
1996 में रेल मंत्री
1999 में संचार मंत्री
2002 में कोयला मंत्री
2014 में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री
2019 में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री

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