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किसानों ने बनाया अजूबा टॉयलेट, पानी की एक भी बूंद का नहीं होता इस्तेमाल

सहज ने बताया कि इस डीकंपोस्ट टॉयलेट की वजह से रोजाना हजार लीटर पानी की बचत होती है। उनके मुताबिक पानी का इस्तेमाल सिर्फ वाशिंग…

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किसाने आंदोलन में जैविक टॉयलेट। फोटोः द लल्लन टॉप।

किसानों का आंदोलन अभी कितने दिनों तक चलेगा इसका अंदाजा नहीं है। आंदोलन में अब धीरे-धीरे और किसानों की भागीदारी बढ़ रही हैं। तो वहीं महिला किसानों की अच्छी खासी भागीदारी देखने को मिल रही है। लंबी मियाद को देखते हुए किसानों सहित कई ngo किसानों के लिए जरूरत की चीजें मुहैया करा रहे है। इन्हीं में से Basicshit NGO ने एक ऐसा टॉयलेट का इजाद किया है जिसमें पानी के एक भी बूंद का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

द लल्लन टॉप को Basicshit NGO संस्था के सहयोगी सहज सिंह ने बताया कि यह एनजीओ पब्लिक सैनिटेशन पर काम करती है। यह संस्था कचड़े, प्लास्टिक की बोतलों के प्रयोग से जरूरत की चीजें बनाती है। सहज ने बताया कि यह एनजीओ पिछले आठ साल से सक्रिय है।

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सहज के मुताबिक किसानों के आंदोलन में महिलाओं के लिए Basicshit NGO ने जो टॉयलेट उपलब्ध कराए हैं वह एक ड्राय टॉयलेट है। इसकी खास बात ये है कि इसमें पानी के एक बूंद का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। सहज के मुताबिक फारिग होने के बाद फ्लश की जगह लकड़ी के बुरादे का इस्तेमाल किया जाता है। इससे ये होता है कि ना तो दुर्गंध फैलती है ना ही कीड़े पड़ने के चांसेज होते हैं।

सहज के मुताबित टॉयलेट सीट के नीचे लगभग 6 फीट का गड्ढा किया गया है जिसमें पराली और लकड़ी के बुरादे का लेयर है। जिससे मल को खाद बनाने में मदद करेंगे। सहज ने बताया कि इसका इस्तेमाल कहीं भी किया जा सकता है। जब प्रोटेस्ट खत्म हो जाएगा तो गड्ढे में मिट्टी डालकर एक वहां एक पौधा लगा दिया जाएगा। इससे पौधे को जैविक खाद से फायदा भी होगा।

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हां, सहज ने बताया कि इस डीकंपोस्ट टॉयलेट की वजह से रोजाना हजार लीटर पानी की बचत होती है। उनके मुताबिक पानी का इस्तेमाल सिर्फ वाशिंग के लिए होता है बाकी कहीं भी पानी की इस्तेमाल नहीं होता है।

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