सर्वेः 54% ग्रामीणों के पास बचा सिर्फ 1 हफ्ते का राशन, 25.5 % बढ़ी बेरोजगारी | ख़बर खर्ची

सर्वेः 54% ग्रामीणों के पास बचा सिर्फ 1 हफ्ते का राशन, 25.5 % बढ़ी बेरोजगारी

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अगर एक हफ्ते लॉकडाउन और बढ़ा तो देश के एक तिहाई परिवार भूख से मर जाएंगे।

कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन (Lockdown) का तीसरा चरण चल रहा है। लोग घरों में कैद हैं। कामकाज पूरा ठप पड़ा है। क्या आम आदमी क्या और औद्योगिक घराने सभी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। लेकिन सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के एक सर्वे की मानें तो 84 फीसदी से अधिक घरों की मासिक आमदनी में काफी गिरावट आई है। वहीं 25 फीसदी लोग पूरी तरह से बेरोजगार हो चुके हैं।

सर्वे में इस बात की ओर भी इशारा किया गया है कि अगर लॉकडाउन 1हफ्ते और बढ़ा तो भारतीय परिवारों में से एक तिहाई से अधिक के पास जीवनयापन के लिए जरूरी संसाधन खत्म हो जाएंगे। गौरतलब है कि मंगलवार देश को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने चौथे चरण के लॉकडाउन के लागू होने के संकते देते हुए कहा कि इसे नए रूप रंग में लागू किया जाएगा। लॉकडाउन का तीसरा फेज 17 मई को खत्म होने वाला है।

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34 फीसदी लोगों की स्थिति खराब

CMIE की रिपोर्ट में इसके चीफ इकनॉमिस्ट कौशिक कृष्णन ने कहा है कि अगर पूरे देश की बात करें तो 34 फीसदी घरों की स्थिति खराब हो चुकी है। ऐसे लोगों के पास सिर्फ एक हफ्ते के लिए राशन पानी बचा हुआ है। इसके बाद वे भूख के शिकार हो जाएंगे। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया है कि समाज में कम आय वर्ग के लोगों को तुरंत मदद किए जाने की जरूरत है। अगर सरकार इनकी मदद नहीं की तो ये कुपोषण और गरीबी की वजह से होने वाली अन्य समस्याओं में घिर जाएंगे।

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2.70 करोड़ युवा एक झटके में हो गए बेरोजगार

सीएमआईई की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में बेरोजगारी के आंकड़ों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 21 मार्च के बाद से बेरोजगारी दर 7.4 फीसदी थी, जो 5 मई को बढ़कर 25.5 फीसदी हो गई है। स्टडी के मुताबिक देश में 20 से 30 साल आयु वर्ग के 2 करोड़ 70 लाख युवाओं को अप्रैल में नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

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बिहार, हरियाणा, झारखंड की स्थिति होगी और बद्तर

बेरोजगारी बढ़ी तो आमदनी भी कम हुई है। भारत के ग्रामीण इलाके( जो शहरी हैं) के 65 फीसदी परिवार के पास सिर्फ 1 हफ्ते का राशन है। वहीं 54 फीसदी लोग एक हफ्ते से ज्यादा दिनों तक सर्वाइव कर सकते हैं। बात करें दिल्ली पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों की तो इनपर लॉकडाउन का असर थोड़ा कम हुआ है। जबकि बिहार, हरियाणा और झारखंड जैसे राज्यों के लोगों की आमदनी पर काफी असर पड़ा है। आगे और भी स्थिति खराब होने वाली है।

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लेबर पार्टिसिपेशन 36.2 फीसदी से बढ़कर 37.6 फीसदी हो गया इसके अलावा 1.78 करोड़ तनख्वाह पर काम करने वाले नौकरीपेशा लोगों का रोज़गार अप्रैल महीने तक खत्म हो चुका है। शहरों में कोविड-19 के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं, जिसके कारण यहां लोगों को रोजगार में अभी भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान लेबर पार्टिसिपेशन 36.2 फीसदी से बढ़कर 37.6 फीसदी हो गया है। जो एरिया ग्रीन और ऑरेंज सर्कल में आ रहे हैं, वहां सरकार उद्योगों को धीरे-धीरे खोलने की अनुमति दे रही है। इससे रोजगार दर 26.4 फीसदी से बढ़कर 28.6 फीसदी हो गई है।

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