जयपुर के बाद भोपाल से चोरी हुआ रेमडेसिविर इंजेक्शन, स्टोर से 850 कोरोना वैक्सीन से भरा बॉक्स गायब | ख़बर खर्ची

जयपुर के बाद भोपाल से चोरी हुआ रेमडेसिविर इंजेक्शन, स्टोर से 850 कोरोना वैक्सीन से भरा बॉक्स गायब

850 remdacivir injection corona vaccine stolen from bhopals
850 remdacivir injection corona vaccine stolen from bhopals

जयपुर के बाद अब मध्यप्रदेश के भोपाल जिले में एक अस्पताल से कोरोना वैक्सीन के सैकड़ों डोज चोरी हो गए हैं। दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक भोपाल के हमीदिया अस्पताल से 850 रेमडेसिविर इंजेक्शन गायब हो गए। हमीदिया भोपाल का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां से इतनी मात्रा में कोरोना वैक्सीन के चोरी होने से कोरोना पीड़ितों के लिए परेशानी खड़ी कर दिया है। अस्पताल प्रशासन को चोरी की बात तब पता चली जब शनिवार की सुबह मरीजों को इंजेक्शन लगाने के लिए डॉक्टर स्टोर रूम गए। लेकिन वहां बॉक्स ही नहीं मिला। इस मामले में अस्पताल के अधीक्षक आईडी चौरसिया का कहना है कि इंजेक्शन चोरी होने की जानकारी मिली है। अभी मीटिंग में हूं। अस्पताल जाकर देखता हूं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में रेमडेसि‍व‍िर इंजेक्शन को लेकर हुई मारा-मारी के बीच सरकार ने इसकी आपूर्ति के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक भोपाल, इंदौर, उज्जैन व देवास को छोड़कर अन्य जिलों में 50% इंजेक्शन आवंटन के कलेक्टर को अधिकार दिए गए हैं। इसी तरह अनुबंधित अस्पताल से कोई राशि नहीं ली जाएगी, जबकि प्राइवेट अस्पताल से प्राप्त राशि ( प्रति इंजेक्शन 1568 रुपए) रेडक्राॅस में जमा कराई जाएगी।

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जयपुर से भी चोरी हो चुका है कोरोना वैक्सीन

बता दें कि भोपाल ही नहीं पिछले दिनों जयपुर से भी ऐसा ही मामला सामने आया था। जयपुर के हरिबख्श कावंटिया अस्पताल से कोरोना वैक्सीन की 320 डोज चोरी हो चुके हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर प्रमुख शिक्षा चिकित्सा सचिव वैभव गैलेरिया और जिला कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा ने जांच शुरू की है। इस तरह देश में अब तक वैक्सीन चोरी के दो गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। डोज गायब होने के मामले में पुलिस को अब तक कोई सुराग हाथ नहीं लगे हैं। 

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क्या है रेमडेसिविर ?

बता दें कि रेमडेसिविर एक एंटी-वायरल दवा है, वायरस के बढ़ने को रोकती है। साल 2009 में अमेरिका के गिलीड साइंसेस ने हेपेटाइटिस सी का इलाज करने के लिए इसे बनाया था। वहीं 2014 तक इस पर रिसर्च चला और तब इबोला के इलाज में इसका इस्तेमाल हुआ। रेमडेसिविर का इस्तेमाल उसके बाद कोरोना वायरस फैमिली के मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (मर्स या MERS) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (सार्स या SARS) के इलाज में किया गया है। यह फॉर्मूला शरीर में वायरस के फलने-फूलने के लिए आवश्यक एंजाइम को काबू करता है। अमेरिकी रेगुलेटर US-FDA ने 28 अक्टूबर 2020 को रेमडेसिविर को कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूरी दी थी। उस समय डोनाल्ड ट्रम्प इन्फेक्ट हुए तो उन्हें भी रेमडेसिविर दी गई थी।

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